Mahadevi Verma Biography in Hindi | महादेवी वर्मा जीवनी, रचनाएं, पुरस्कार, रोचक तथ्य?

mahadevi verma ka jivan parichay, महादेवी वर्मा की रचनाएँ, महादेवी वर्मा का साहित्यिक परिचय-

हैलो दोस्तों आज के इस लेख में आप सभी का सवागत है। आज के इस लेख में आप जानेंगे Mahadevi Verma Biography in Hindi में। आप सभी ने Mahadevi Verma जी के बारे में ज़रूर सुना होगा। Mahadevi Verma जी हिंदी साहित्य की एक महान कवियत्री है। और साथ ही साथ सुविख्यात लेखिका भी रह चुकी है।

Mahadevi Verma जी हिंदी साहित्य जगत में एक बेहतरीन लेखिका के रूप में जानी पहचानी जाती है। तो आज हम आपको mahadevi verma ka jivan parichay, उनकी शिक्षा, उनका परिवार, उनकी रचनाएं व पुरस्कार आदि के बारे में बताएगें। तो चलिए देखते हैं कि कौन थी Mahadevi Verma जी।

Mahadevi Verma कौन है- Mahadevi Verma Biography in Hindi?

Mahadevi Verma का जन्म 1907 में हुआ था जो की हिंदी साहित्य के छायावाद युग की एक प्रसिद्ध कवयित्री, निबंधकार, और प्रख्यात लेखिका थीं। Mahadevi Verma ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित की जा चुकी है।

Mahadevi Verma आधुनिक युग की मीरा के नाम से बहुत ही ज़्यादा प्रसिद्ध है। Mahadevi Verma की
कविताओं में एक प्रेमी से दूर होने का कष्ट और पीड़ा नज़र आती हैं। साथ ही साथ उन्होंने महिलाओं की शिक्षा पर भी काफी ज़ोर दिया है। उनका मानना था कि समाज की हर एक महिला को शिक्षा मिलनी चाहिए जिससे कि वो समाज में अपने अधिकारों को समझ सके और सम्मान भी पा सके।

Mahadevi Verma हिन्दी भाषा की प्रख्यात कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी थी।अपनी कविताओं के माध्यम से देश का हाल और महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए हिन्दी साहित्य की मशहूर कवियत्री Mahadevi Verma का बहुत ही बड़ा योगदान रहा है। वह भारत सरकार द्वारा 1956 में पद्मभूषण और साल 1988 में  पद्मा विभूषण से सम्मानित भी हो चुकी है।

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय?

पूरा नाममहादेवी वर्मा
जन्म 26 मार्च 1907
जन्म स्थान फ़र्रुख़ाबाद, उत्तर प्रदेश
पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा
माता का नामहेमरानी देवी
पति का नाम डॉ. रुपनारायण वर्मा
भाई का नामजगमोहन वर्मा और महमोहन वर्मा
बहन का नाम श्यामा देवी
प्रिय सखी का नाम श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान
शिक्षा एम.ए.(संस्कृत)
आयु 80 वर्ष
व्यवसाय उपन्यासकार, कवित्री, कहानी लेखिका
साहित्यक आंदोलन छायावाद
अवार्ड पद्म विभूषण
प्रसिद्धि का कारणप्रप्रख्यात कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी
प्रसिद्ध रचनाएं स्मृति की रेखाएं, पथ के साथी, अतीत के चलचित्र, दीपशिखा, मेरा परिवार, नीहार, श्रंखला की कड़ियां, नीरजा।
मृत्यु 11 सितम्बर 1987
मृत्यु स्थान इलाहाबाद , उत्तर प्रदेश
Mahadevi Verma Biography

Mahadevi Verma जी हिन्दी साहित्य की महान कवियित्री थी, उनका जन्म 26 मार्च, 1907 में उतर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में होली के दिन पैदा हुआ था। जिस परिवार में Mahadevi Verma का जन्म हुआ था , उस परिवार में बहुत सालो तक कोई लड़की पैदा नहीं हुई थी। इसलिए वह बहुत ही ज़्यादा लाड और प्यार से पली थी।

Mahadevi Verma के दो छोटे भाई व एक छोटी बहन थी। Mahadevi Verma के पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा था जो कि एक जाने-माने अध्यापक और वकालत थे। और इनकी माता का नाम हेम रानी देवी था जो कि एक अध्यापक थी। और वह ग्रंथ और पुराणों को हमेशा पढ़ती रहती थी।

Mahadevi Verma के माता व पिता दोनों को शिक्षा का बहुत ही ज़्यादा ज्ञान था। यही कारण है कि Mahadevi Verma एक महान और प्रसिद्ध कवयित्री थी।

बचपन ही से Mahadevi Verma हिन्दी साहित्य के मशहूर लेखक सूर्याकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और सुमित्रानन्दन पंत को अनुसरण करती आ रही है और उनसे बहुत करीब भी थी। Mahadevi Verma ने 40 सालों तक निराला के हाथों में राखी भी बांधी थी।

Mahadevi Verma को छायावादी युग की प्रमुख कवयित्री माना जाता है। और ये आधुनिक हिन्दी साहित्य में मीराबाई के नाम से और गद्य लेखिका के रूप में भी प्रसिद्ध थी। Mahadevi Verma मज़बूत विश्वासों वाली महिला थीं और महिलाओं के अधिकारों के लिए हरदम लड़ती भी रहती थीं।

इलाहाबाद में कॉलेज जाने के बाद, उनकी शादी हो गई और वह बनारस चली गईं। यहीं से उन्होंने अपनी कविताओं को लिखने का सफर शुरू किया था। उनका मुख्य मकसद महिलाओं को शिक्षा के लिए बढ़ावा देना और उनको जागरूक करना था।Mahadevi Verma को बचपन से ही लिखने का बहुत ही ज़्यादा शौक था। उनहोंने 7 साल की उम्र से कविताएं लिखना शुरू कर दी थी।

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Mahadevi Verma की शिक्षा-

Mahadevi Verma के माता व पिता दोनों ही अध्यापक थे। जिसकी वजह से उनके घर पर पढाई का एक अच्छा माहौल बना रहता था।और वह घर पर ही अंग्रेज़ी, संगीत और संस्कृति सीखती थी।

  • Mahadevi Verma ने 1912 में इंदौर के मिशन स्कूल से अपनी पढ़ाई की शुरुआत की थी। फिर इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद के एक प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।
  • 1920 में Mahadevi Verma ने प्रयाग से मिडिल पास किया। जिसमें उन्होंने पहला स्थान हासिल किया।
  • 1924 में Mahadevi Verma ने हाई स्कूल किया और उसमें भी उनहोंने प्रथम स्थान हासिल किया।
  • Mahadevi Verma ने 1925 में अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी कर ली थी। फिर उसके बाद ही से उनकी कविताएं देश में प्रसिद्ध होने लगी और छपने लगी थी।
  • 1926 में Mahadevi Verma ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
  • 1928 में क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज से Mahadevi Verma ने बीए की पढाई पूरी की।
  • 1932 व 1933 में Mahadevi Verma ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से संस्कृत में एम.ए. किया। उसी बीच उनकी दो प्रसि्द्ध कृतियां रश्मि और नीहार प्रकाशित हो चुकी थीं।

Mahadevi Verma के अनुसार क्रॉस्टवेट के छात्रावास में रहने के दौरान उन्हें काफी कुछ नया सीखने को मिला था। हॉस्टल में बहुत सारे धर्मों व जाति के लोग एक साथ रहते थे। जिनसे Mahadevi Verma ने एकता की सीख हासिल की। फिर इसके बाद Mahadevi Verma ने बौद्ध ग्रंथों के अध्ययन के लिए पाली और प्राकृत भाषा में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की।

Mahadevi Verma का वैवाहिक जीवन-

Mahadevi Verma जी का विवाह बहुत ही कम उम्र में हो गया था। पढ़ाई के दौरान जब Mahadevi Verma की उम्र केवल 9 वर्ष की थी तो उनका विवाह श्री स्वरूप नारायण वर्मा से हो गया था। उस समय स्वरूप नारायण वर्मा दसवीं कक्षा में पढ़ते थे।

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Mahadevi Verma का परिवार-

Mahadevi Verma जी के पिता का नाम गोविंद सहाय वर्मा था। जो कि पेशे से एक वकील थे ।और उनकी माता का नाम श्रीमती हेमरानी देवी था जो कि एक साधारण कवित्री महिला थी और वो भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त थी। Mahadevi Verma जी के माता व पिता दोनों ही बहुत ही ज़्यादा शिक्षित थे।

इसलिए उनके घर पे पढ़ाई का माहौल बना रहता था और यही कारण है कि Mahadevi Verma जी भी एक प्रसिद्ध कवित्री बनी। Mahadevi Verma के दो छोटे भाई थे जिनका नाम जगमोहन वर्मा और महमोहन वर्मा था। और एक बहन भी थी जिनका नाम श्यामा देवी था। Mahadevi Verma की बहुत ही कम उम्र में शादी हो गई थी।

इनके पति का नाम श्री स्वरूप नारायण वर्मा था। Mahadevi Verma जी की एक प्रिय सखी भी थी जिनका नाम श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान था।

Mahadevi Verma का साहित्यिक परिचय-

Mahadevi Verma को बचपन ही से कविताएं लिखने का बहुत शौक था। उन्होंने 7 वर्ष की उम्र से ही कविताएं लिखना शुरू कर दी थी। Mahadevi Verma एक प्रसिद्ध कवियत्री होने के साथ साथ एक समाज सुधारक भी थी। वह महिलाओं को समाज में उनका अधिकार और आदर सम्मान दिलवाने के लिए बहुत प्रयास किया करती थी।

Mahadevi Verma जी को आधुनिक काल की मीराबाई इसलिए कहते हैं क्योंकि उनहोंने अपनी कविताओं में प्रेमी से बिछडने के कष्ट और पीड़ा को बहुत ही सुंदर तरीके से बताया है। Mahadevi Verma ने अपनी काव्य और गद्दे के माध्यम से दलित , गरीब, चर्चित नारी, विधवाओं  को प्रमुख विषय बनाकर लोगों मे जागरूकता फैलाने का प्रयास किया था। Mahadevi Verma को बहुत सारे उपाधि और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

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Mahadevi Verma की रचनाएँ-

संस्मरण – मेरा परिवार 1972
पथ के साथी 1956
निबंध – संकल्पिता 1969
श्रंखला की कड़ियाँ194
रेखाचित्र – अतीत के चलचित्र 1941
स्मृति की रेखाएं 1943
ललित निबंध- क्षणदा1956
प्रसिद्ध कहानियाँ गिल्लू
संस्मरण, रेखाचित्र और निबंधों का संग्रह हिमालय 1963
Mahadevi Verma Biography in Hindi

Mahadevi Verma के प्रसिद्ध गघ-

अतीत के चलचित्र 1961
स्मृति की रेखाएं1943
संस्मरण 1943
संभाषण1949
विवेचानात्मक गद्य 1972
स्कन्धा1956
हिमालय 1973
श्रृंख्ला की कड़ियां1972
महादेवी वर्मा मप्रसिद्ध गघ

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Mahadevi Verma के प्रसिद्ध काव्य-

  • शाम का गीत
  • नीहारो
  • रश्मि
  • पहला आयाम
  • अग्नि रेखा
  • सप्तपर्णा

Mahadevi Verma की Poems-

दीपशिखा 1942
नीहार1930
प्रथम आयाम1974
अग्निरेखा 1990
नीरजा 1934
रश्मि 1931
सांध्यगीत 1936
सप्तपर्णा 1959
महादेवी वर्मा Poems

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Mahadevi Verma के कार्य-

Mahadevi Verma ने अपना सारा जीवन लेखन और अध्यापन को समर्पित कर दिया था। उन्होंने इलाहाबाद के प्रयाग महिला विद्यापीठ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। Mahadevi Verma ने हमेशा महिलाओं की शिक्षा व सम्मान के हक की बात की है।1923 में Mahadevi Verma ने महिलाओं के मुद्दों पर आधारित पत्रिका लिखी जिसका नाम ‘चांद’ था।

1955 में Mahadevi Verma ने इच्छाचन्द्र जोशी की मदद से इलाहाबाद में साहित्य सदन की स्थापना की थी। Mahadevi Verma भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी से बहुत ही ज़्यादा प्रभावित रहती थी। Mahadevi Verma ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में अपनी कविताओं के माध्यम से बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और साथ ही साथ झांसी में बहुत सारे स्वतंत्रता सैनानियों की मदद भी की थी।

1935 में Mahadevi Verma ने इलाहाबाद में प्रयाग महिला विद्यापीठ की स्थापना की थी। इस पे Mahadevi Verma ने बहुत ही लम्बे समय तक काम किया। इतना ही नही बल्कि Mahadevi Verma ने लेखन के साथ ही साथ बहुत सारे अखबारों और पत्रिकाओं के संसाधनों में भी काम किया था। Mahadevi Verma जी कुछ सालों तक उत्तर प्रदेश विधान सभा की मनोनीत सदस्य भी रहीं थी।

Mahadevi Verma का भारतीय साहित्य में योगदान-

जहाँ हिन्दी साहित्य की बात होती है वहां Mahadevi Verma का नाम ज़रूर आता है। उनहोंने अपना जीवन महिलाओं को शिक्षा व सम्मान दिलाने के साथ साथ साहित्य प्रेमियों के लिए भी बिताया है। इसी वजह से 1979 में मशहूर फिल्म निर्देशक मृणाल सेन के द्वारा Mahadevi Verma के जीवन पर आधारित एक बंगाली फिल्म ‘नील अक्षर नीचे’ बनाई गई थी।

14 सितम्बर 1991 में भारत सरकार के द्वारा Mahadevi Verma और जयशंकर प्रसाद के सम्मान में स्टैम्प भी ज़ारी किए गए थे।

Mahadevi Verma द्वारा प्राप्त किये गए अवार्ड व सम्मान-

Mahadevi Verma जी को उनके पूरे जीवन में बहुत सारे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें साहित्य के लिए नेहरू पुरस्कार, सरस्वती सम्मान और कुमार गंधर्व सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।

1934 नीरजा के लिए सक्सेरिया पुरस्कार।
1942द्विवेदी पदक,यामा के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार।
1943 भारत भारती पुरस्कार, मंगला प्रसाद पुरस्कार।
1952उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए Mahadevi Verma को मनोनीत किया गया था।
1956हिंदी साहित्य की सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार।
1969 विक्रम विश्वविद्यालय में डी.लिट. की उपाधि मिली।
1977 कुमाऊं विश्वविद्यालय में डी.लिट की उपाधि मिली।
1979 साहित्य अकादेमी फेल्लोशिप से नवाज़ी गई।
1980 दिल्ली विश्वविद्यालय ने डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया।
1982 ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुई।
1984 उद्घाटन साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुई और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था।
1988 मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा पदम विभूषण की उपाधि से नवाज़ी गई।
महादेवी वर्मा अवार्ड

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Mahadevi Verma की मृत्यु-

Mahadevi Verma जी ने अपने जीवन का ज़्यादातर समय इलाहाबाद में ही बिताया और वही पे 11 सितम्बर 1987 को उनकी मृत्यु हो गई। इनका जन्म होली के दिन 26 मार्च 1907 में फर्रुखाबाद में हुआ था।Mahadevi Verma जी के अद्भुत व्यक्तित्व और उनकी प्रतिभा को देखकर बहुत सारे महान रचनाकार और लेखक उनसे प्रभावित हुए और उन्हें ‘साहित्य साम्राज्ञी’, जैसा नाम दिया।

Mahadevi Verma की famous lines-

“पथ को न मलिन करता आना
पद चिन्ह न दे जाता जाना
सुधि मेरे आगम की जग में
सुख की सिहरन बन अंत खिली!”

Mahadevi Verma photos

लोगो ने यह भी पूछा (FAQ)

Q. महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं क्या है?

महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है:-
अग्निरेखा
दीपशिखा
सप्तपर्णा
संक्षेप में
नीहार
रश्मि
नीरजा
सांध्यगीत

Q. महादेवी वर्मा कब मरी थी?

महादेवी वर्मा निधन 11 सितंबर 1987 को हुआ था

Q. महादेवी वर्मा की प्रथम रचना कौन सी है?

महादेवी वर्मा की प्रथम रचना निहार है जिसे (1930) में रची थी

निष्कर्ष-

तो दोस्तों ये था लेख हिंदी साहित्य के छायावाद युग की एक प्रसिद्ध कवयित्री, निबंधकार, और प्रख्यात लेखिका Mahadevi Verma के बारे में। जिसमें हमने आपको Mahadevi Verma Biography in Hindi में बताई। Mahadevi Verma हिंदी साहित्य की एक प्रसिद्ध कवयित्री, निबंधकार, और प्रख्यात लेखिका थी और रहेंगी। उनकी प्रमुख रचनाएँ हमें बहुत कुछ सिखाती है।

आशा करते हैं कि आप को यह लेख पसंद आया होगा और Mahadevi Verma जी के बारे में आपको ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी प्राप्त हुई होगी। अगर आप अपने दोस्तों को भी Mahadevi Verma जी के बारे में जानकारी देना चाहते हैं तो उनके साथ इस लेख को ज़रूर शेयर करें।

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