private limited company rules in hindi | प्राइवेट लिमिटेड के नियम

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हैलो दोस्तों आज के इस लेख में आप सभी का सवागत है। अगर आप private limited company rules के बारे में पूरी जानकारी लेना चाहते हैं तो इस लेख को अन्त तक ज़रूर पढ़े। इस लेख में आप को सारी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।

इंडिया में अगर कोई Private Limited Company शुरू करना चाहता है तो उसे कुछ नियमों का पालन करना होता है। अगर वह नियमों का अच्छी तरह से पालन नही करेगा तो उसे भारी भुगतान भी देना पड़ सकता है।

तो इस लेख को आप अन्त तक ज़रूर पढ़े जिससे आप private limited company rules in hindi अच्छे से समझ पाएं।

Private Limited Company क्या होती है.?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एक ऐसी कंपनी होती है जो एक निजी व्यक्ति या एक समूह के द्वारा स्थापित की जाती है। इसमें सदस्यों की संख्या 50 तक होती है। इस प्रकार की कंपनियों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कहते हैं

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के प्रकार

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के दो प्रकार होते हैं:

संस्थागत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी:

इसमें सदस्यों की संख्या कम से कम दो और अधिकतम 200 होती है। यह कंपनी संस्था के रूप में स्थापित की जाती है जिसमें सदस्यों को उनके शेयर के अनुसार वोटिंग अधिकार होते हैं।

अनुभवशील प्राइवेट लिमिटेड कंपनी:

इसमें सदस्यों की संख्या कम से कम दो और अधिकतम 200 होती है। इस प्रकार की कंपनी निजी शेयर और अनुभवशीलता के आधार पर स्थापित की जाती है जिसमें सदस्यों को वोटिंग अधिकार होते हैं और शेयरों को एक निश्चित समय के लिए बंद करने का विकल्प होता है।

Private Limited Company Rules in hindi-

कंपनी के निगमन के 180 दिनों के अन्दर बिज़नेस शुरू करना –

हर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जो की रजिस्ट्रड हो चुकी हो उसे आवश्यक शेयर कैपिटल के साथ आधिकारिक टिप्पणी या कंपनी के निगमन से आने वाली किसी भी ऑर्डर के इस्तेमाल से पहले बिज़नेस प्रमाण पत्र की शुरुआत प्राप्त करनी होती है। और साथ ही साथ निगमन के 180 दिनों के अन्दर ही बिज़नेस शुरू करना होता है।

बोर्ड की रिपोर्ट और फाइनेंशियल स्टेटमेनट-

कंपनी एक्ट, 134 की धारा 2014 के अनुसार, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक रिपोर्ट, जिसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की ज़िम्मेदारी और मीटिंग्स हो। कम्पनी
फाइनेंशियल स्टेटमेनट के साथ लगाई जाती है।

एनुअल जेनरल मीटिंग-

हर Private Limited Company को एनुअल जेनरल मीटिंग करना ज़रुरी होती है। कम्पनी को अपने फाइनेंशियल वर्ष के मुताबिक छह महीने अपनी एनुअल जेनरल मीटिंग करना ज़रुरी होता है। ऐसी एनुअल जेनरल मीटिंग केवल working days में ही होनी चाहिए। और एनुअल जेनरल मीटिंग ऐसी जगह की जाए जहां कोई रजिस्ट्रीशन ऑफिस स्थित हो।

लेखा परीक्षक-

सभी Private Limited Company को कंपनी के निगमन के बाद एक लेखा परीक्षक appoint करना होता है। क्योंकि कंपनी एक्ट, 134 की धारा 2013 के अनुसार, लेखा परीक्षक की रिपोर्ट कंपनी फाइनेंशियल स्टेटमेनट के साथ लगाई जाती है।

इन्कम टैक्स –

सभी Private Limited Company को अपने फाइनेंशियल वर्ष की due date से पहले अपना इन्कम टैक्स रिटर्न भरना होता है। Company को एडवांस्ड इन्कम टैक्स के लिए quarterly payment करना होता है। इसके अलावा, यदि कंपनी की सकल प्राप्तियां पिछले फाइनेंशियल वर्ष से 1 करोड़ रुपये ज़्यादा हैं, तो ऐसे में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा टैक्स ऑडिट किया जाता है।

डिजिटल केवाईसी-

कंपनी के डायरेक्टर को डीआईएन, ईकेवाईसी या डीआईआर, ईकेवाईसी (कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया नया फॉर्म) फॉर्म को ज़रूर फ़ाइल किया होना चाहिए। क्योंकि कंपनी के सभी डाइरेक्टरो के केवाईसी को अपडेट करने के लिए इन सब फॉर्मों की ज़रूरत होती है। सभी डाइरेक्टरो को उस फॉर्म में अपने ईमेल और फोन नंबर देना होते है।

एमसीए फॉर्म AOC-4 के लिए फाइलिंग-

सभी रजिस्ट्रड Private Limited Company को एमसीए फॉर्म एओसी -4 फाइल करना होता है। वो भी हर फाइनेंशियल वर्ष की निर्धारित तिथि से पहले।

एमसीए फॉर्म एमजीटी – 7 के लिए फाइलिंग-

सभी रजिस्ट्रड Private Limited Company को एमसीए फॉर्म एमजीटी -7 फाइल करना होता है। वोभी हर फाइनेंशियल वर्ष की निर्धारित तिथि से पहले।

डायरेक्टर्स रिपोर्ट-

सभी डायरेक्टर्स को किसी दुसरी कंपनी में अपने निदेशक पद के बारे में किसी भी विवरण का खुलासा करना होता है। डायरेक्टर कंपनी को लिखित में एक declaration letter देता हैं। इसके अलावा, सभी डायरेक्टरो में से कोई एक कम से कम 182 दिनों के लिए भारत में रहने वाला होना चाहिए।

बोर्ड मीटिंग-

कंपनी के निगमन के 30 दिनों के अन्दर ही एक बोर्ड मीटिंग करनी आवश्यक होती है। बोर्ड मीटिंग में कम से कम 2 डायरेक्टर या फिर कुल डायरेक्टर्स की संख्या में से 1/3 डायरेक्टर्स वहाँ मौजूद होने चाहिए। बोर्ड मीटिंग की सूचना मेम्बरस को पहले से दे देनी चाहिए। इस सूचना में बोर्ड मीटिंग का दिन और समय ज़रूर मेनशेन होना चाहिए और साथ ही साथ यह सूचना सभी मेम्बरस को मीटिंग होने के 7 दिन पहले दे देनी चाहिए।

अन्य नियम-

Private Limited Company में एनुअल फाइलिंग के अलावा भी विशिष्ट उदाहरण हो सकते हैं। ऐसे मामले में, कंपनी को कंपनी एक्ट, 2013 द्वारा निर्धारित समय की एक विशिष्ट अवधि के भीतर रजिस्ट्रड अधिकारी के साथ उस विशेष घटना के लिए एक अलग फॉर्म फ़ाइल करना होता है।

Private Limited Company के रजिस्ट्रीशन के लिए कौन-कौन से कागज़ लगते हैं-

MOA (मेमोरेन्डम ऑफ ऐसोसिएशन)- यह आपके बिज़नेस को सेटअप करने का उद्देश्य, बिज़नेस का नेचर, बिज़नेस के ऑब्जेक्टिव और केपिटल कलोस के बारे में बताता है। यह एक कॉर्पोरेट कागज़ होता है, जिसे हम कंपनी का चार्टर भी कह सकते हैं। जो कि कम्पनी और कम्पनी के शेयर होल्डर्स के समबन्ध को दर्शाता है और साथ ही साथ कम्पनी के लक्ष्यों को भी समझाता है।

AOA (आर्टिकल ऑफ ऐसोसिएशन)- यह कागज़ कम्पनी के इंटरनल ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में बताता है।
यह हर एक मेम्बर का मैनेजिंग प्रोसेस,कर्तव्य, ज़िम्मेदारि,डिविडेनड पोलिसी, शेयर होल्डर्स की बैठक और डाइरेक्टरस के apppintment को बताता है।

सर्टिफिकेट ऑफ इनकोर्पोरेशन- यह एक तरह का लाईसेंस होता है जो कि रजिस्ट्रीशन के लिए सारे ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने के बाद डाइरेक्टर द्वारा रिसीव किया जाता है। यह दस्तावेज़ ROC के द्वारा जारी किया जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़- अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जैसे कि आईडी प्रूफ (पैन कार्ड, आधार कार्ड), एड्रेस प्रूफ (राशन कार्ड, वोटर आईडी), रेंटल एग्रीमेंट, प्रॉपर्टी ओनर से एनओसी और सेल डीड की कॉपी ओन्ड प्रॉपर्टी के लिए। यह सब अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ Private Limited Company के लिए लगते हैं।

Private Limited Company का रजिस्ट्रीशन प्रोसेस-

डिजिटल सिग्नेचर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन-

यह डिजिटल सिग्नेचर एक समान सिग्नेचर की तरह ही होता है।और यह सभी directors और shareholders के लिए ज़रूरी होता है। लेकिन केवल अधिकृत कर्मचारी ही इस सिग्नेचर का उपयोग कर सकते हैं।

डायरेक्टर आईडेंटिफीकेशन नम्बर (डीआईएन) के लिए आवेदन-

कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय 8 अंकों का नंबर उस व्यक्ति को allot करता है जो कंपनी का director बनना चाहता हो। यह एक अनोखा डिजिटल नम्बर होता है। जो इन्टरनेट पर व्यक्ति के कॉर्पोरेट प्रयासों, सूचना और सेवाओं से जुड़ा हुआ होता है।

कंपनी के नाम की उपलब्धि-

अपनी कंपनी का रजिस्ट्रीशन करवाने से पहले, यह ज़रूर देख ले कि जो नाम आप को आप की कम्पनी के लिए चाहिए है वो उपलब्ध है या नहीं। आप इसे Ministry of Corporate Affairs (MCA) की वेबसाइट के पोर्टल पर जाके देख सकते हैं।

ROC को आवश्यक दस्तावेज़ देना-

जब आप अपनी कम्पनी के नाम के लिए confirmation ले लेते हैं तो उसके बाद आपको ROC (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज) को सारे ज़रूर दस्तावेज़ भेजने होते हैं। फिर ROC आपको certificate of incorporation देती है और साथ में इसकी एक कापी भी देती है।

MOA और AOA दर्ज करना-

फिर आपको MOA (मेमोरेन्डम ऑफ ऐसोसिएशन) और AOA (आर्टिकल ऑफ ऐसोसिएशन) फ़ाइल करना होता है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

पैन और टैन-

कंपनी की रचना के साथ स्थायी खाता संख्या (पैन)(PAN), एक कर कटौती और संग्रह खाता संख्या (टीएएन) (TAN) ज़ारी करना होता है। Private Limited Company के लिए PAN और TAN नंबर पाने के लिए GST और भविष्य निधि का रजिस्ट्रीशन होनना आवश्यक होता है।

बैंक अकाउंट-

यह रजिस्ट्रीशन प्रोसेस का आखिरी स्टेप होत हैं। इसमे आपको कम्पनी के सभी लेनदेन के लिए कम्पनी के ही नाम से एक बैंक अकाउंट खोलना होता है।

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Private Limited Company के फायदे-

Private Limited Company के लिए हमें कोई न्यूनतम केपिटल की ज़रूरत नहीं होती है। एक Private Limited Company को केवल 10,000 रुपये के केपिटल के साथ भी रजिस्टर कराया जा सकता है।

Private Limited Company कानून के हिसाब से एक separate legal entity है। इसका मतलब यह हुआ कि बिज़नेस की aseets और liabilities और डाइरेक्टरस की assets और liabilities एक समान नही होती है। दोनों को अलग-अलग ही माना जाता है।

Private Limited Company मेनेजमेन्ट और ऑनरशीप को अलग-अलग रखती है। इसलिए कम्पनी के फायदे और नुकसान के लिए केवल मैनेजर ही जवाबदेही होता है।

अगर Private Limited Company को कोई भी financial loss होता है तो वह loss किसी भी सदस्य के assets से पूरा नही किया जाता है। क्योंकि सदस्य की liability limited होती है। Private Limited Company वेंचर कैपिटलिस्ट या फिर एंजेल निवेशकों से funds जुटा सकती है।

शेयरों को आसानी से एक shareholder से दुसरे shareholder को ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए केवल share transfer form को फ़ाइल करके उसपे साइन करके शेयर सर्टिफिकेट के साथ शेयर बायर को दे देना होता है।

Private Limited Company में 100% foreign direct investment (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की अनुमति होती है। जिसका मतलब है कि कोई भी विदेशी व्यक्ति सीधे Private Limited Company में इनवेस्टमेंट कर सकता है।

Private Limited Company के नुकसान-

  1. Private Limited Company अपने लेखों द्वारा शेयरों की हस्तांतरण को प्रतिबंध कर देता है।
  2. Private Limited Company में सदस्यों की संख्या 50 से अधिक नहीं होती है।
  3. Private Limited Company जनता को प्रॉस्पेक्टस नही देती है।
  4. स्टॉक एक्सचेंज में, शेयरों को उद्धृत नहीं किया जाता है।

Private Limited Company के Rules का पालन ना करने पर क्या होता है –

  • अगर कोई Private Limited Company, कम्पनी एक्ट 2013 के द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने में असफल हो जाती है तो उस पे ये सब जुर्माने लगाए जाते है।
  • 50,000 रुपये का जुर्माना कम्पनी के लिए और 1000 रुपये का जुर्माना डाइरेक्टर के लिए होता है अगर वे बिज़नेस प्रमाण पत्र प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं।
  • अगर कोई कम्पनी वैधानिक लेखा परीक्षक appoint करने में असफल हो जाती है तो उस पे हर महीने 300 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। ऐसे appointment के बिना, कम्पनी को अपना काम शुरू करने की इजाज़त नहीं होती है।
  • अगर कोई कम्पनी एमसीए फॉर्म एओसी-4 को फाइल करने में असफल हो जाती है तो उस पर हर दिन 200 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।
  • अगर कोई कम्पनी एमसीए फॉर्म एमजीटी-7 को फाइल करने में असफल हो जाती है तो उस पर हर दिन 200 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है
  • अगर कोई कम्पनी डीआईएन केवाईसी फाइल करने में असफल हो जाती है तो उस पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है

निष्कर्ष-

तो दोस्तों आज के इस लेख में आपने private limited company rules in hindi में जाना। और साथ ही साथ Private Limited Company क्या होती है, कितने प्राकार की होती है, Private Limited Company के फायदे व नुकसान और अन्य इम्पोर्टेड चीज़ें।

एक Private Limited Company को कंपनी एक्ट, 2013 के अनुसार सभी नियमों का पालन करना चाहिए। तभी एक Private Limited Company क़ानूनी तौर पे सही मानी जाएगी। और साथ ही साथ रजिस्ट्रीशन प्रोसेस करते समय हर एक ज़रूरी दस्तावेज़ का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और कोई नकली दस्तावेज़ नही लगाना चाहिए।


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