Aids Kaise Hota Hai in Hindi – ऐड्स कैसे होता है

हैलो फ्रेंड्स, आपने एड्स नाम की बीमारी का नाम तो सुना ही होगा? या आपने कभी अपने आसपास एड्स के केसेस देखे होंगे? या आपने कभी किसी को एचआईवी पॉजिटिव सुना होगा? और अगर आपने नहीं सुना तो आपको संक्रमित रोगों के बारे में तो जरूर पता होगा, एड्स इन्हीं रोगों में से एक संक्रमण से होने वाला रोग है।

दोस्तो यह रोग हवा के द्वारा तो नही फेलता लेकिन, फिर भी यह एक संक्रमित रोग है। अब आप सोच रहे होंगे की अगर यह हवा से नही फेलता तो यह संक्रमित रोग कैसे हुआ? और आपके दिमाग मे ये भी जरूर आ रहा होगा की एड्स होता कैसे है?

तो दोस्तो अगर आप जानना चाहते हो की एड्स या एच आई वी पॉजिटिव कैसे होते हैं? तो आपके लिए हमारी यह पोस्ट बेहद काम आने वाली है। आज हम आपको अपनी इस पोस्ट मे बतायेंगे कि, ” एड्स कैसे होता है?” अगर आप जानना चाहते हो की एड्स कैसे होता है तो, हमारी इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े। इस अर्टिकल मे हम आपको बतायेंगे कि –

  • 1. एड्स क्या होता है?
  • 2. एड्स कैसे हो सकता है? एड्स होने के अलग अलग माध्यम क्या है?
  • 3. एड्स का संक्रमण कैसे होता है? या एड्स एक संक्रमित बीमारी कैसे है?
  • 4. एड्स से सुरक्षा कैसे कर सकते है?

यह पूरी जानकारी आपको हमारी इस पोस्ट मे मिलेगी।

Aids Kaise Hota Hai
Aids Kaise Hota Hai in Hindi

एड्स क्या होता है? HIV पॉजिटिव किसे कहते हैं? ( Aids Kaise Hota Hai ) –

एड्स – एक्वायर्ड इम्युनो डिफिसियेन्सि सिंड्रोम एक संक्रमित, यानी कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाला रोग है। जोकि HIV ( human immuno deficiency virus) के वजह से होता है। किसी व्यक्ति में एचआईवी जब पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाता है तो उसे एड्स का मरीज या एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति के शरीर में एचआईवी हो उसे एड्स होगा ही होगा।

शरीर में एचआईवी की उपलब्धता  एचआईवी पॉजिटिव कहलाता है, और एचआईवी के संपूर्ण सक्रिय होने को एड्स कहते हैं। एक ऐसा संक्रमण होता है, जो हवा या पानी के द्वारा नहीं होता। लेकिन यह इंसान के खून या अन्य कई माध्यमों के द्वारा हो जाता है। एड्स से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। जिससे अलग बीमारियां शरीर में देखने को मिलती है, और रोगी हमेशा अस्वस्थ रहता है।

यह एक ऐसा संक्रमण है, जो धीरे-धीरे करके शरीर में बढ़ता है। बिना टेस्ट किए आप कभी भी एड्स की सक्रियता का पता नहीं लगा सकते। एड्स खुद में कोई बीमारी नहीं होती है, शरीर में एचआईवी की उपस्थिति और बढ़ने के वजह से हमारी लक्षिका कोशिकाओं की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे इतनी कम हो जाती है कि, हमें अनेक बीमारियां घेरने लगती है, जिनका इलाज करना नामुमकिन हो जाता है ऐसी स्थिति में व्यक्ति मर भी सकता है इसे ही एड्स कहते हैं।

एचआईवी संक्रमण से एड्स तक की स्थिति में पहुंचने के लिए 8 से 10 या इससे भी ज्यादा वर्ष लग सकते हैं। एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता इतनी कम हो जाती है कि, व्यक्ति को को जल्द ही आसानी से छोटे मोटे लोग जैसे – सर्दी, जुकाम, आदि पकड़ लेते हैं, और यह जल्दी और आसानी से ठीक नहीं हो पाते।

” शरीर में एचआईवी के संक्रमण के बाद एचआईवी के पूर्ण सक्रिय होने की स्थिति को एड्स कहा जाता है। “

एड्स कैसे होता है? –

 दोस्तों, यह एक बीमारी नहीं बल्कि एक संक्रमण है तो,  यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फेल कर पनपता है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में डालने के लिए एचआईवी के अलग-अलग माध्यम होते हैं। हम आपको एड्स होने के अलग-अलग माध्यमों के बारे में बताएंगे।

एड्स फैलने के तीन मुख्य कारण होते हैं। –

  • a. असुरक्षित यौन संबंधों से।
  • b. रक्त के आदान-प्रदान से।
  • C. माँ से शिशु में संक्रमण के द्वारा।

a. असुरक्षित यौन संबंधों से – पूरे विश्व भर में एड्स होने का सबसे आम कारणों में से एक कारण है- असुरक्षित यौन संबंध। एच आई वी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से एड्स के फैलने के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं। गुदा संभोग करते समय यदि एक व्यक्ति एचआईवी संक्रमित हो तो दूसरे व्यक्ति में संभोग द्वारा एचआईवी जा सकता है। मुख मैथुन में भी एचआईवी के एक से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर होने के चांसेस ज्यादा होते हैं। अगर समय पर एचआईवी की जांच कर उपचार न किया जाए तो यह एड्स में परिवर्तित हो सकता है।

अगर कभी भी आपका पार्टनर एचआईवी पॉजिटिव हो तो बिना सुरक्षा के यौन संबंध नहीं बनाने चाहिए। एचआईवी पॉजिटिव होने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध ही है। संयुक्त राज्य अमेरिका में एड्स होने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध ही है। समलैंगिक हो या विषम लैंगिक दोनों प्रकार के यौन संबंधों में एचआईवी के फैलने के चांस होते हैं।  गुदा संभोग करने में मुखमैथुन ( oral sex ) करने की अपेक्षा एचआईवी फैलने के ज्यादा चांस होते हैं।

b. रक्त या संक्रमित सुई के आदान-प्रदान से – एड्स शरीर की तरल कोशिकाओं ( रक्त ) के आदान-प्रदान से भी हो जाता है। संक्रमित व्यक्ति का खून अगर दूसरे व्यक्ति के शरीर में डाल दिया जाए तो एड्स या एचआईवी पॉजिटिव होने के चांस बढ़ जाते हैं। लेकिन आज के समय में रक्त दान से पूर्व हमेशा खून की जांच की जाती है, जिस कारण संक्रमित रक्त के दान की वजह से एड्स होने के चांस बहुत कम हो चुके हैं।

लेकिन एचआईवी संक्रमित मरीज पर प्रयोग की गई सुई अगर अन्य व्यक्तियों पर प्रयोग की जाती है तो, एचआईवी होने का चांस बढ़ जाता है। ब्लड टेस्ट क्या एचआईवी टेस्ट करते समय जिस सुई का प्रयोग किया जाता है, उस सुई के अलग-अलग व्यक्तियों पर प्रयोग होने से एचआईवी संक्रमण हो सकता है। अफ्रीका में एक होने का सबसे बड़ा कारण संक्रमित सुई का प्रयोग ही है।

नसों में नशीली दवाओं ( drugs ) को लेते समय भी  बहुत से व्यक्ति एक ही सुई का उपयोग करते हैं, यह भी एड्स संक्रमण का एक बहुत बड़ा कारण है। नशा करते समय अक्सर लोग एक ही सुई का साझा प्रयोग करते हैं, अगर इनमें से कोई भी एक व्यक्ति एचआईवी संक्रमित होता है तो अन्य व्यक्तियों में एचआईवी पॉजिटिव होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।

c. मां से शिशु में संक्रमण के द्वारा – एचआईवी संक्रमण होने का तीसरा और सबसे आम  माध्यम है मां से शिशु में संक्रमण होना। संक्रमित माँ से शिशु को भी एचआईवी संक्रमण हो सकता है। एक माँ से उसके बच्चे में एचआईवी संक्रमण दो कारणों से हो सकता है। पहला प्रसव के समय, और दूसरा स्तनपान करवाते समय।  यदि बच्चे के जन्म से पूर्व मां एचआईवी से संक्रमित हो तो एक माँ से उसके शिशु में एचआईवी संक्रमण के 20% चांस होते है।

और यदि जन्म के समय संक्रमण नहीं फैलता तो स्तनपान करवाते समय संक्रमण के फैलने के 30% चांस होते हैं। कई बार बच्चा ऐसी मां का स्तनपान भी कर लेता है जो पहले से ही एचआईवी से संक्रमित या एड्स से संक्रमित हो।  ऐसे में शिशु को भी एड्स होने के चांस ज्यादा होते हैं।

तो यह कुछ मुख्य माध्यम है, जिनकी वजह से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को एड्स हो सकता है। तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में एचआईवी संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। अगर इन बातों का उचित ध्यान रखा जाए तो एक या एचआईवी संक्रमण से बचा जा सकता है।

एड्स के लक्षण

शरीर में एचआईवी संक्रमण के बाद एड्स होने परएड्स के कुछ शुरुआती लक्षण, और एड्स के पूर्ण सक्रिय होने परभी कुछ लक्षण देखने को मिलते हैं।जिससे कि थोड़ा बहुत अंदाजा लग सकता है कि, रोगी को एड्स की समस्या हो रही है।

एड्स के शुरुआती लक्षण

थकान लगनायदि बिना कोई भारी काम किए अगर आपको जल्दी जल्दी थकान लगती है तो यह भी एचआईवी संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं।

सूखीखाँसीहोनायदिबिना भारीकफ्के सुखी खांसी हो रही है, तो यह भी एड्स के शुरुआती लक्षणों में से एक है।इसके अलावा मुंह का स्वाद बिगड़े रहना, कफ में खून ना आना यह भी कुछ लक्षण हो सकते हैं।

जुखाम लगनाबारबारजुकामकाहोना,  बेमौसम नाक का बहना यह भी एचआईवी के शुरुआती लक्षण होते हैं।

मांस पेशियों में खिंचाव होना बिना कोई काम किए, या बिनाकोई मेहनत किए मांसपेशियों में दर्द होता है, या खिंचाव लगता है तो,यह भी एचआईवी का शुरुआती लक्षण होता है।

जोड़ों में दर्द व सूजन का होनाबुजुर्ग लोगों में जोड़ों का दर्द व सूजन होना सामान्य होता है।लेकिन,बिना उम्र के ही जोड़ों में दर्द व सूजन का होना भी एचआईवी के शुरुआती लक्षण होते हैं।

इन्हीं कुछ लक्षणों के अलावा सिर में बार-बार दर्द रहना,बुखार का बार बार होना,गले का पकना,मुंह में छालों का होना, त्वचा पर रैशेज होना, जैसे कुछ शुरुआती लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

एड्सके पूर्णसक्रिय होने के बाद के लक्षण

शुरुआती लक्षणों का बार-बार लौटनाअगरकिसी व्यक्ति कोएड्सकी समस्या लंबे समय से हो चुकी है तो, उस व्यक्ति को एड्स के शुरुआती लक्षण जैसे- सिर दर्द,बुखार,मुंह में छाले, मांसपेशियों में दर्द,जैसी समस्याएं कुछ समय के बाद बार-बार देखने को मिल जाती है।भले ही वह व्यक्ति कुछ समय के लिए कुछ दवाइयों का सेवन करके ठीक हो जाए।लेकिन कुछ समय बाद दोबारा यह सारी समस्याएं लौटने लगती है।

सामान्य समस्याओं का आसानी से ठीक ना होना

एड्स से पीड़ित व्यक्ति को जो भी छोटी-मोटी समस्याएं होती है, वह जल्दी से ठीक नहीं होती।चाहे वह व्यक्ति कितनी ही दवाइयों का सेवन क्यों ना कर ले लेकिन यह समस्याएंजल्दी ठीक नहीं होती।और जो समस्याएं ठीक हो भीजातीहै।वह कुछ समय बाद दोबारा लौटने लगती हैं।

यह कुछ लक्षण होते हैं जिन्हें ध्यान में रखकर और पहचान कर आप इसकी पहचान कर सकते हैं।अगर आपको यह लक्षण देखने को मिल रहे हैं तो जरूरी नहीं है कि आपको एक ही हो लेकिन यह सभी लक्षण एड्स के प्राथमिक लक्षणों में आते हैं।

एड्स से बचने के उपाय –

  1. मां को गर्भावस्था या प्रसव के दौरान एंटीरेट्रोवायरल दवा देकर।
  2. बच्चे को संक्रमित मां का दूध में पिलाने से।
  3. ऑपरेशन द्वारा प्रसव करके।
  4. नवजात शिशु को भी एंटीरेट्रोवायरल दवा की सही खुराक देकर।
  5. कभी भी एचआईवी पॉजिटिव के साथ असुरक्षित यौन संबंध न रखे।
  6. हो सके तो यौन संबंध बनाने से पूर्व हमेशा सुरक्षा ( कंडोम) का उपयोग अवश्य करे।
  7. रक्तदान करने से पहले रक्त की जांच करवानीचाहिए।
  8. एक बार प्रयोग की गई सुई का दोबारा क्यों नहीं करवाना चाहिए।
  9. ब्लड टेस्ट या एचआईवी टेस्ट में प्रयोग हुई हुई का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए।
  10. नसों में किसी भी प्रकार की नशीली दवाओं के उपयोग करने के लिए साझा सुई का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  11. अगर आपको एड्स के शुरुआती लक्षणों में से कोई भी लक्षण देखने को मिलता है, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल ना करें। डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

 एड्स के मरीजों को कैसा भोजन करना चाहिए?

दोस्तों इस के बारे में जानकारी लेने के बाद आपके दिमाग में यह सवाल तो जरूर आया होगा कि,एड्स के मरीजों को कैसा भोजन करना चाहिए।दोस्तों एड्स के मरीजों को खाने में इन बातों का ध्यान देना चाहिए।-

  1. प्रोटीन युक्त भोजन जैसे – दाल, अंडा,मछली, बींस, आदि ऐसी चीजों का सेवन करें जिनमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन हो।
  2. फल एवं हरी सब्जियों का सेवन करें। फल एवं हरी सब्जियांएड्सकेकारण होने वाले रोगोमें से प्रतिरक्षण में सहायता करती है।
  3. सबूतअनाज का सेवन करें, साबूदाना जिया साबुत मूंग को भिगोकर खाएं। गेहूं या भूरे आटे की रोटियों का सेवन करें।आपकी सही में ऊर्जा स्तर को बढ़ाएगा।
  4. खाने में चीनी और नमक का उपयोग कम करें।जितना हो सके चीनी से परहेज रखें मिर्च मसालों का सेवनभीकम करें।
  5. हो सके तो एड्स के मरीजों को भोजन में वसा का कम ही सेवन करना चाहिए। ज्यादा वसा के सेवन से शरीर पर कुप्रभाव ज्यादा पड़ सकता है।

खाने पीने में यही कुछ सावधानियों को ध्यान में रखने से,आपको एड्सकीवजहसेहोनेवालेरोगोंके प्रति लड़ने में सहायता मिलेगी।और सही में ऊर्जा स्तर बना रहेगा।

निष्कर्ष

दोस्तों हमने अपनी इस पोस्ट में आपको एड्सरोग से जुड़ी सारी जानकारी देने की पूरी कोशिश की है। लेकिन फिर भी अगर आपके मन में एड्सकैसेहोताहै से जुड़े कोई भी सवाल हो तो, आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं। हम आपको जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। अगर आपको पोस्ट पसंद आई हो तो, पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें।

Disclaimer – दोस्तों हमारे द्वारा इस आर्टिकल में लिखी गई जानकारी किसी डॉक्टर द्वारा नहीं लिखी गई है। यह जानकारी पूर्ण रूप से रिसर्च द्वारा प्राप्त की गई है। हम अपने किसी भी पोस्ट में बिना डॉक्टर की सलाह कीकिसीभीदवाई का सेवन करनेकीसलाह, यारोगोंकीसटीकजानकारी कीगारंटीनहीदेते। कृपया किसीभीरोगसे संबंधित जानकारी के लिए एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

लोगों द्वारा एड्स एवं एड्स कैसे होता है? को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल –

प्रश्न 1- क्या झूठा खाने से भी एड्स फैल सकता है?

उत्तर – जी नहीं जूठा खाने से एड्स नहीं फैलता।

प्रश्न 2- क्या एचआईवी पॉजिटिव होने से इंसान की मृत्यु हो सकती है?

उत्तर – जी नहीं, एचआईवी पॉजिटिव होने से तुरंत मृत्यु नहीं होती।  समय से उपचार होने पर स्वास्थ्य ठीक हो सकता है। लेकिन अगरएड्सपूर्ण रूप से सक्रिय हो जाए तो मनुष्य की मृत्यु होजातीहै।

प्रश्न 3 – क्या एड्स का अभी तक कोई इलाज नहीं है?

उत्तर – जी हां अगर एड्स पूर्ण रूप से सक्रिय हो तो उसका कोई इलाज अभी तक नहीं है।  किंतु शुरुआती संक्रमण में सही उपचार से स्वास्थ्य ठीक भी हो सकता है।

प्रश्न 4 – एड्स के लक्षण क्या-क्या होते हैं? 

उत्तर – एड्स के मुख्य लक्षण –

सर्दी, जुकाम, बुखार, टाइफाइड, पीलिया आदि छोटी-छोटी शुरुआती बीमारियां।

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